हमारा शरीर प्रकृति का ही एक हिस्सा है और जब हम प्राकृतिक लय के साथ तालमेल बिठाकर चलते हैं, तो बीमारियां हमसे दूर रहती हैं। आयुर्वेद के अनुसार वात, पित्त और कफ का संतुलन बनाए रखना स्वस्थ जीवन की पहली शर्त है।
उषापान से करें दिन की शुरुआत
सुबह सूर्योदय से पहले उठकर तांबे के बर्तन में रात भर रखा हुआ गुनगुना पानी पीना उषापान कहलाता है। यह आदत आंतों की सफाई करती है और शरीर के विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है।
तेल मालिश यानी अभ्यंग का जादू
नहाने से पहले तिल के तेल या नारियल के तेल से पूरे शरीर पर हल्की मालिश करना बेहद लाभदायक है। यह त्वचा में नमी बनाए रखता है, रक्त संचार बढ़ाता है और वात दोष को नियंत्रित करके जोड़ों के दर्द से बचाव करता है।
ऋतु के अनुसार आहार का चुनाव
मौसम के मिजाज को समझकर भोजन चुनना ही असली आयुर्वेद है। ताजे, स्थानीय और मौसमी फल-सब्जियों का सेवन करें तथा बासी या बहुत अधिक प्रसंस्कृत भोजन से परहेज करें ताकि शरीर में प्राकृतिक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे।
